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Arvind Kejriwal: हीरो बनकर आए, लेकिन विलेन कहलाए, अरविंद केजरीवाल को लेकर क्या है आपकी राय?

Arvind Kejriwal: उम्मीदों का चेहरा, विवादों का बादशाह, अरविंद केजरीवाल को लेकर क्या है आपका नजरिया?

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Arvind Kejriwal: “नमस्कार मेरा नाम है अरविंद केजरीवाल”, कुछ इसी अंदाज में हरियाणा के लाल यानी ‘अरविंद केजरीवाल’, ने दिल्ली के सीएम पद की शपथ ली. अरविंद केजरीवाल, जिन्होंने हरियाणा से निकलकर देश की राजधानी दिल्ली में राज किया. उन्होंने अपने कार्यों से दिल्लीवालों के दिल में ऐसी जगह बनाई कि दिल्लीवासियों ने उन्हें एक या दो बार नहीं, बल्कि तीन बार अपने मुख्यमंत्री के रूप में चुना.

विपक्ष ने कई बार गिराने की कोशिश की
विपक्ष ने अरविंद केजरीवाल को कई बार गिराने की कोशिश की. उन पर कई तरह के आरोप भी लगाए गए, लेकिन विपक्ष शायद ये भूल गया था कि जिसे हटाने की कोशिश की जा रही है उसकी रग-रग में हरियाणा का खून बह रहा है. उस धरती का खून जहां महाभारत का युद्ध हुआ था. भला वो शख्स कैसे डर सकता था.

परिवार में मौजूद हैं ये सदस्य
युद्ध भूमि हरियाणा में जन्मे अरविंद केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त, 1968 को हिसार जिला के सिवान में हुआ. उनकी माता का नाम गीता देवी और पिता का नाम गोबिंद राम केजरीवाल है. जबकि उनकी पत्नी का नाम सुनीत केजरीवाल है. अरविंदर केजरीवाल और सुनीता केजरीवाल के दो बच्चे हैं.

IIT खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री की हासिल
अरविंद केजरीवाल ने प्राथमिक शिक्षा हिसार और सोनीपत के प्राइवेट स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने 1985 में IIT-JEE परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 563 प्राप्त की. अरविंद केजरीवाल ने IIT खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. पढ़ाई पूरी होने के बाद वह जमशेदपुर में टाटा स्टील कंपनी में शामिल होकर काम करने लगे. टाटा स्टील जमशेदपुर भारत का पहला और सबसे बड़ा एकीकृत इस्पात संयंत्र है.

आयकर विभाग में भी किया काम
टाटा स्टील के साथ कुछ समय काम करने के बाद उन्होंने यहां से इस्तीफा दे दिया. हालांकि यहां तक भी उनका राजनीति से कोई कनेक्शन नहीं था. इसके बाद उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर आयकर विभाग में सहायक आयकर आयुक्त के रूप में भारतीय राजस्व सेवा में नौकरी की. केजरीवाल ने कुछ समय काम करने के बाद यहां से भी इस्तीफा दे दिया.

इस साल हुआ था ‘आम आदमी पार्टी’ का गठन
नौकरी छोड़ने के बाद अरविंद केजरीवाल सामाजिक कार्यों में लग गए. इसी तरह उन्हें प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचान मिल गई और फिर वो अन्ना अजारे के साथ चल दिए. केजरीवाल एक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का हिस्सा बन गए. साल 2011 में वे अन्ना हजारे के साथ जुड़े और उनके साथ मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत आंदोलन का नेतृत्व करने लगे. इसके बाद उन्होंने साल 2012 में अपनी खुद की पार्टी का गठन किया, जिसका नाम था ‘आम आदमी पार्टी’.

फिल्मी स्टाइल में हुई राजनीति में एंट्री
अरविंद केजरीवाल की जिस तरह राजनीति में एंट्री हुई उसकी कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है, क्योंकि एक समय वो था जब अरविंद केजरीवाल का राजनीति से कोई ताल्लुख नहीं था. ये तो एक आम सा नागरिक था, लेकिन उन्होंने एक ऐसी पार्टी का गठन किया, जिसका नाम ही ‘आम आदमी’ था. एक ऐसी पार्टी जिसका एक समय पर कोई अस्तित्व नहीं था, लेकिन जब देश में भाजपा और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियों का बोलबाला था तब अरविंद केजरीवाल और उनके कार्यकर्ताओं ने इस पार्टी को घर-घर तक पहुंचाया.

साल 2015 में पहली बार ली सीएम पद की शपथ
साल 2015 ये वो साल था जब अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने बहुमत से जीत हासिल की. ये वो पार्टी थी, जिसका गठन देश में कुछ ही समय पहले हुआ था, लेकिन पहली बार में ही अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के सीएम पद की कुर्सी पर बैठने का मौका मिल गया.

कुछ महीनों में ही कांग्रेस और बीजेपी को दी टक्कर
बड़ी बात ये थी कि इस पार्टी को उस समय जीत मिली जब दिल्ली में कांग्रेस और बीजेपी को टक्कर देना किसी भी पार्टी के लिए बहुत मुश्किल था, क्योंकि कांग्रेस काफी समय तक दिल्ली की सत्ता में रही और बीजेपी का नाम देश की बड़ी पार्टी में शुमार था. ऐसे में किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि जिस पार्टी का गठन ही साल 2012 में हुआ वो पार्टी महज कुछ महीनों में दिल्ली की सत्ता में कैसे आ सकती है?

साल 2013 में पहली बार ली सीएम पद की शपथ
दिल्ली के सातवें मुख्यमंत्री के रूप में चुने गए अरविंद केजरीवाल ने साल 2013 में पहली बार सीएम पद की शपथ ली. हालांकि उन्होंने 49 दिन बाद ही पद से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देने का कारण था अपने प्रस्तावित भ्रष्टाचार विरोधी कानून के लिए समर्थन जुटाने में असमर्थ होना. इसके बाद साल 2015 में दिल्ली के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर कांग्रेस और बीजेपी को मात देकर जीत का परचम लहराया और उस जीत को 2015 से 2025 तक लगातार बरकरार रखा.

2015 के बाद 2020 में तीसरी बार ली सीएम पद की शपथ
साल 2015 के बाद 2020 के विधानसभा चुनाव में भी ‘आप’ ने बाजी मार ली. दिल्ली की जनता ने एक बार फिर आम आदमी पार्टी को राजधानी के विकास के लिए चुना. ऐसे में अरविंद केजरीवाल ने लगातार तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राजधानी में मिले बहुमत के बाद ‘आप’ ने देश के अलग-अलग कई राज्यों में बहुमत पाने की कोशिश की, लेकिन उसे बाकी राज्यों में सफलता नहीं मिल पाई, लेकिन साल 2022 में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की.

सीएम पद पर रहते हुए जाना पड़ा जेल
दिल्ली में लगातार मिल रहे बहुमत के बीच 21 मार्च 2024 को अरविंद केजरीवाल को ED ने उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया. अरविंद केजरीवाल भारत के ऐसे पहले मुख्यमंत्री बने जो सीएम पद पर रहते हुए जेल गए. यहां 10 दिन हुई पूछताछ के बाद उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया. इसके बाद 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए अरविंद केजरीवाल की आम चुनाव के लिए रिहाई को मंजूरी दे दी और केजरीवाल कुछ समय के लिए जेल से बाहर आ गए.

13 सितंबर 2024 को मिली थी जमानत
हालांकि ये रिहाई कुछ ही दिनों के लिए थी. कोर्ट के आदेशानुसार, केजरीवाल ने 2 जून को तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया. इसके बाद 13 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ एक बार फिर अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी, लेकिन इसके कुछ दिन बाद ही कुछ ऐसा हुआ जिसके बारे में किसी ने नहीं सोचा था.

17 सितंबर 2024 को सीएम पद से दे दिया था इस्तीफा
17 सितंबर 2024 ये वो था दिन जब केजरीवाल ने अपने सीएम पद से ये कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि ‘वह दोबारा तभी मुख्यमंत्री बनेंगे जब उन्हें जनता का जनादेश मिलेगा’ और उन्होंने अपनी जगह आतिशी मार्लेना को सीएम पद की जिम्मेदारी सौंप दी, लेकिन केजरीवाल को अपने इस फैसले का भारी नुकसान उठाना पड़ा. साल 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.

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