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Delhi Dog Vivad: डॉग्स को शैल्टर करना सही या गलत, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या है आपकी राय?

Delhi Dog Vivad: सुप्रीम कोर्ट के डॉग शेल्टर आदेश पर उठ रहे ये बड़े सवाल, क्या है आपकी राय?

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Dog Vivad: सोशल मीडिया के दौर में आज किसी भी मुद्दे को लेकर विवाद होने में समय नहीं लगता है. सोशल मीडिया पर बैठा हर इंसान खुद को जर्निलिस्ट समझ बैठा है. जरा सी देर में किसी भी मुद्दे पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आना शुरू हो जाती है. किसी भी मुद्दे को ट्रेंड बनने में देरी नहीं लगती है. चाहे वो मुद्दा देश का हो या विदेश का, इंसान का हो या जानवर का.

कोर्ट ने सुनाया ये फैसला
कुछ ऐसा ही इन दिनों भी हो रहा है. सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अलग ही जंग छिड़ी हुई है. ये जंग किसी व्यक्ति विशेष या किसी सरकारी नौकरी की भर्ती को लेकर नहीं है, बल्कि डॉग्स को लेकर छिड़ी हुई है. दरअसल, देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2025 को डॉग्स को लेकर एक फैसला सुनाया था. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के नगर निकायों को 8 हफ्तों में दिल्ली की सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया था. इस आदेश में कहा गया कि दिल्ली एनसीआर के सभी कुत्तों को पकड़कर उन्हें शैल्टर होम में रखा जाए. इसके साथ ही उनकी नसबंदी कराई जाए.

कोर्ट के फैसले को कैसे देखा जा रहा
कोर्ट के इस फैसले के बाद देश का एक वर्ग डॉग्स के समर्थन में आ गया है जबकि दूसरा वर्ग कोर्ट के फैसले का समर्थन कर रहा है. दोनों वर्ग अपनी-अपनी परिस्थिति और भावना के आधार पर इस फैसला को देख रहे हैं. जो वर्ग कोर्ट के फैसले का समर्थन कर रहा है वो डॉग्स से डरा हुआ है. जबकि दूसरा वर्ग वो जो कोर्ट के फैसले का विरोध कर रहा है वो कहीं ना कहीं डॉग्स से भावनात्मक लगाव महसूस करता है, जिसके चलते वो सड़कों पर उतरकर और सोशल मीडिया पर डॉग्स से जुड़ी पोस्ट शेयर कर कोर्ट से ये फैसला वापस लेने की मांग कर रहा है.

कोर्ट का फैसला आने के बाद किस बात पर विवाद
अगर देखा जाए तो दोनों ही वर्ग के लोग अपनी-अपनी जगह सही हैं, लेकिन कोर्ट के इस फैसले के बाद जनता के मन में कई सवाल हैं. पहला सवाल ये कि क्या डॉग्स से इतना खौफ रखना सही है, क्योंकि उनके हिसाब से डॉग्स के अंदर भी भावनाएं होती हैं वो भी इंसान से ठीक वैसे ही लगाव रखते हैं जैसे एक इंसान दूसरे इंसान से लगाव महसूस करता है. दूसरा सवाल ये कि दिल्ली में डॉग्स की संख्या लगभग 10 लाख के आस-पास है, ऐसे में अगर सरकार इनके लिए शैल्टर होम बनाती है तो क्या 8 हफ्ते में 10 लाख शैल्टर होम तैयार किए जा सकेंगे और अगर तैयार कर भी लिए तो उनमें इतनी बड़ी संख्या में डॉग्स के रख-रखाव की व्यवस्था होगी.

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