Tesla: जब इंजीनियर कुछ हटकर सोचता तो जरूर कुछ बड़ा करता है, कुछ ऐसी ही है Tesla की कहानी
Tesla: हर इंजीनियर के लिए मोटिवेशनल है TESLA की कहानी, दो इंजीनियर्स ने बना दी अरबों की कंपनी

Tesla: जब भी इलेक्ट्रिक कार की बात आती है तो जुबां पर सबसे पहले ‘टेस्ला’ का ही नाम आता है. टेस्ला जो लोगों का सपना बन चुका है. टेस्ला ने आज वो कर दिखाया है जो कभी सपना मात्र था. ना सिर्फ इलेक्ट्रिक कार बल्कि टेस्ला ने आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI की दुनिया में भी परचम लहरा दिया है. देखा जाए तो टेस्ला आज कहीं भी पीछे नहीं रहा है. टेस्ला को आज दुनिया की सबसे बड़ी इनोवेटिव कंपनी के रूप में देखा जाता है.
हर देश के बाजार के लिए सपना है ‘टेस्ला’
हर देश चाहता है कि उनके यहां भी टेस्ला की एंट्री हो. भारत का नाम भी इस लिस्ट में शामिल था, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भारत का ये सपना सच हो गया है. जी हां भारत में टेस्ला की एंट्री का इंतजार अब खत्म हो चुका है. लंबे इंजतार के बाद टेस्ला ने भारत में शानदार एंटी कर दी है. 15 जुलाई, 2025 को इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी Tesla ने मुंबई के बीकेसी में अपना पहला शोरूम ओपन कर दिया. इसके साथ ही कंपनी ने SUV Model Y कार भी लॉन्च कर दी है. SUV Model Y की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 60 लाख रुपये रखी गई है. ऐसे में अब Tesla ने भारतीय बाजार में आधिकारिक तौर पर कदम रख दिया है.
कुछ लोगों ने पहले ही खरीद ली थी SUV Model Y
हालांकि कुछ लोगों ने Tesla की SUV Model Y कार को भारतीय बाजार में आने से पहले ही अपने घर की शोभा बना लिया था. अब आप सोचेंगे कि वो कैसे. दरअसल कुछ लोगों ने SUV Model Y कार को Tesla के भारत में आने से पहले विदेश से इंपोर्ट करवा लिया था, लेकिन इसके लिए उन्हें करोड़ों रुपये की कीमत चुकानी पड़ी थी. इतना ही उन लोगों को कई कानूनी औपचारिकताओं को भी पूरा करना पड़ा था.
भारतीय ग्राहकों के लिए शुरू की गई बिक्री
मुंबई में पहला शोरुम खोलकर अपनी अधिकारिक एंट्री के बाद टेस्ला ने भारतीय ग्राहकों के लिए बिक्री शुरू कर दी है. माना जा रहा है कि भारत में बिक्री के लिए जर्मनी और चीन से गाड़ियां मंगवाई जा सकती हैं. ऐसा इसलिए भी क्योंकि पिछले कुछ समय में चीन और यूरोप के बाजार में टेस्ला की गाड़ियों की बिक्री काफी कम हुई है. ऐसे में अब भारत में लोगों का टेस्ला की ओर बढ़ रहे क्रेज को देखते हुए कंपनी का फोकस भारत पर ज्यादा रहने वाला है.
इस दिन हुई थी टेस्ला की शुरुआत
टेस्ला की शुरुआत 1 जुलाई, 2003 को हुई. इस दिन मार्क टारपेनिंग और मार्टिन एबरहार्ड नाम के दो इंजीनियर्स ने साथ मिलकर टेस्ला मोटर्स की नींव रखी, जिनका मकसद था पर्यावरण को सुरक्षित रखता और इसके लिए ऐसी कार बनाना जो पेट्रोल और डीजल वाली कारों की तरह पर्यावरण को नुकसान ना पहुंचाएं. हालांकि शुरुआत में उनके आइडिया पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था, लेकिन बाद में जब इस पर ध्यान दिया गया तो उनका आइडिय सफल हुआ और टेस्ला दुनिया की सबसे बड़ी इनोवेटिव कंपनी बन गई. इससे पता चलता है कि जब एक इंजीनियर कुछ हटकर सोचता है तो कुछ बड़ा करता है.





